TMC Leader Mamata Banerjee ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर ही बगावत और साजिश के संकेत दिए हैं। 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद पहली बार इतने बड़े राजनीतिक झटके का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस अब अंदरूनी विवादों से भी जूझती दिखाई दे रही है।
दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई अहम बैठक में ममता बनर्जी ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ चुनाव परिणामों और संगठन की स्थिति पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि बैठक में उन्होंने बेहद सख्त रुख अपनाया और साफ शब्दों में कहा कि पार्टी या शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह की बगावत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी ने बैठक में कहा कि पार्टी के कुछ अपने ही लोगों ने नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने संकेत दिए कि चुनाव के दौरान अंदर से तोड़फोड़ हुई और कुछ नेताओं ने संगठन को कमजोर करने का काम किया। इसी वजह से अब पार्टी स्तर पर जांच शुरू करने का फैसला लिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए TMC ने एक अनुशासन समिति का गठन किया है। इस समिति में पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल किए गए हैं, जिनमें Derek O’Brien, Firhad Hakim, Chandrima Bhattacharya और Asima Patra शामिल हैं। यह समिति पार्टी विरोधी गतिविधियों और चुनावी नुकसान के पीछे के कारणों की जांच करेगी।
इसके अलावा अशांति प्रभावित जिलों में हालात का जायजा लेने के लिए तीन अलग-अलग फैक्ट-फाइंडिंग टीमें भी बनाई गई हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि कई क्षेत्रों में चुनाव के दौरान असामान्य घटनाएं हुईं जिनकी गहराई से जांच जरूरी है।
बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह जनता के जनादेश का सम्मान करती हैं, लेकिन इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ विरोध बताया और कहा कि अगर उन्हें हटाना है तो हटा दिया जाए, लेकिन वह पीछे हटने वाली नहीं हैं।
ममता बनर्जी ने अपने विधायकों से विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर आने की अपील भी की। इसे चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध माना जा रहा है।
TMC प्रमुख ने चुनाव में धांधली के गंभीर आरोप भी लगाए। उनका दावा है कि पार्टी के पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरी हुआ तो मामला अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी ले जाया जा सकता है।
वोट शेयर को लेकर भी ममता बनर्जी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वोट शेयर का अंतर लगभग 30 लाख वोटों का रहा, जबकि लगभग इतनी ही संख्या में नाम हटाए गए थे। साथ ही ऑनलाइन लाखों नए नाम जोड़े जाने को लेकर भी उन्होंने संदेह जताया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी हार के बाद TMC के भीतर अब बड़े संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आने वाले दिनों में पार्टी के कई नेताओं पर कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।














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